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बाबा साहब के नाम पर एक भव्य कार्यक्रम हुआ सम्पंन
December 7, 2019 • Tariq • उत्तरप्रदेश

 

 बाबा साहब अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर जिले के अलोपीबाग मे सरदार पटेल संस्थान  में हुआ (यादगार शाम - बाबा साहब के नाम) पर एक भव्य कार्यक्रम सम्पंन हुआ । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पदमश्री कल्पना सरोज उद्योगपति एवं समाज सेविका तथा विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सभाजीत यादव एवं न्यायमूर्ति आर0एस0 मौर्य (अ0प्रा0) रहे है । इस कार्यक्रम के विशेष संबोधन मे सुबचन राम प्रधान आयकर आयुक्त प्रयागराज ने कहा की भारत का संविधान दुनिया के संविधान से बड़ा है जिसे बाबा साहब अंबेडकर ने लिखा है । संविधान में बाबा साहब ने देश के सर्व समाज के लिए समता ,समानता और न्याय के लिए सम्मान से हर नागरिक को जीने का अधिकार दिया है । कार्यक्रम में लंदन से आए विशिष्ट अतिथि एमएस बहल ने कहा कि बाबा साहब बी0आर0 अंबेडकर विश्व की महान हस्ती में से एक हैं । उन्होंने जो संविधान में भारत के लोगों को व्यवस्था दी है वह काबिले तारीफ है । इस देश के दलितों ,पिछड़ों ,मजदूरों, गरीबों को सम्मान से और बराबरी से जीने का हक बाबा साहब ने दिया है । अगर आज भारत देश की व्यवस्था चल रही है तो वह भारतीय संविधान से ही चल रही है, किसी और विधान की व्यवस्था से नहीं चल रही है ।

vol - 1 - कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पदमश्री कल्पना सरोज उद्योगपति एवं समाज सेविका ने कहा की वह जो कुछ भी आज हैं, वह बाबा साहब बी0आर0 अंबेडकर की देन है । उनके विचारों और महामानव गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाकर आज वह जहां जिस मुकाम पर पहुंची हैं वह बाबा साहब की देन है । उन्होंने कहा जिस समाज को तिरस्कृत नजरों से सवर्ण समाज के लोग देखते हैं ,अगर उस समाज की   महिला आज विकास में आगे हैं और देश की महिलाओं को जो अधिकार पुरुषों के मुकाबले सम्मान से बराबरी का जो अधिकार मिला है वह बाबा साहब अंबेडकर की ही देन है ।

 vol -2 - इस कार्यक्रम में शामिल पूर्व सांसद बहराइच सावित्रीबाई फूले ने कहा कि आज कुछ मनुवादी विचारधारा के लोगों की वजह से संविधान खतरे में है । लोग संविधान को तोड़ मरोड़ कर दलितों ,पिछड़ों, गरीब ,मजदूरों के अधिकारों को समाप्त करना चाहते हैं लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाएगा इसके लिए वह देशव्यापी आंदोलन करेंगी। उन्होंने कहा कि लोग संविधान को हटाकर मनुस्मृति लागू करना चाहते हैं ताकि ढाई हजार साल से जो दलित ,पिछड़ा, गरीब व महिला समाज जो आज विकास कर रहा है वह सवर्ण समाज के लोगों को हजम नहीं हो रहा है । आज अगर इस देश मे कोई दलित एमपी, एमएलए, प्रधान, आईएएस,डॉक्टर, वकील ,इंजीनियर एवं राष्ट्रपति अनुसूचित जाति का है तो वह संविधान की देन है किसी भगवान की देन नहीं है ।

इस कार्यक्रम में देश-विदेश की कई हस्तियां शामिल  हुई और उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन एवं उनकी शिक्षा और लंदन में पढ़ाई के बारे में विचार रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा कि आज लोगों को पढ़ लिख कर अपने अधिकार जानने और उसे हासिल करने के लिए आगे आने की जरूरत है ।

मक्खन लाल कौशाम्बी सवांददाता