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बीएसएनल टीडीएम ने 22 महीने से ठेका श्रमिकों का रोक रखा है भुगतान, कई परिवार आत्महत्या की कगार पर
February 28, 2020 • Tariq • उत्तरप्रदेश

बीएसएनल टीडीएम ने 22 महीने से ठेका श्रमिकों का रोक रखा है भुगतान, कई परिवार आत्महत्या की कगार पर

आखिर 22 महीने से भुगतान न होने के कारण कैसे चला रहें श्रमिकों के परिवार जन अपना खर्च

देश की सरकारी टेलिकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की मौजूदा हालत कोई एक-दो दिन की देन नहीं है, बीएसएनएल की सेवाएं लेने वाली दूसरी सरकारी कंपनियों ने ही उसे धीरे-धीरे इस हाल में पहुंचाया है जिसके कारण बीएसएनएल अब अपने कर्मचारियों व कांट्रेक्ट लेबरों की बकाया धन राशि नही दे पा रही है, बरहाल ये बीएसएनएल और दूसरी कंपनी के बीच का मामला है इसमें कर्मचारी या श्रमिकों से कोई लेना देना नही और न ही उनके भुगतान रोकने की कोई अनुमति है इसी कड़ी में जौनपुर ज़िले के बीएसएनएल कॉन्ट्रेक्ट लेबरों का 22 महीनों से भुगतान रोका गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है कुछ परिवार का तो कहना है कि अगर सरकार इस विषय पर कोई ध्यान नही देती है तो कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को आत्महत्या भी करना पड़ सकता है कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के जौनपुर ज़िला सचिव दयाराम यादव ने बताया कि दूरसंचार जिला प्रबंधक (TDM) सिर्फ आश्वासन देते है लेकिन कोई भुगतान नही करवाते जिससे सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी भुगतान न होने के कारण भुखमरी की कगार पर पहुच चुके है, अधीनस्थ बीटीएस टावर दूरभाष केंद्रों पर कार्यरत ठेका श्रमिकों को मजदूरी के रूप में मात्र 1500 रुपए प्रतिमाह बीएसएनएल के अधिकारी द्वारा तय हुई थी इतने कम पैसों में गुजारा करने और अपने बच्चो का पालन पोषण शिक्षा व इलाज और घर चलाने वाले श्रमिकों की जब 22 महीनों से वेतन देना बंद कर दिया गया तो उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर और बद से बदतर हो गई ऐसे में उन सभी ने जिला मुख्यालय पर अपनी आवाज बुलंद की और धरना देकर सभी श्रमिकों ने भूमिका निभाई, जिसमे जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव, जिला सचिव दयाराम यादव, कार्यकर्ता गण देवपति, अनिल कुमार, अमान अहमद फरीदी, शैलेंद्र यादव, मिट्ठू लाल, नीतू लाल, दशरथ, मनोज दुबे, सद्दाम हाशमी आदि शामिल रहें ।

अब ऐसे में देखना ये होगा कि क्या इन श्रमिकों की आवाज़ सरकार तक पहुचेगी और सरकार इनकी आवाज सुनेगी क्या इन्हे न्याय मिलेगा क्या इनके परिवार वालो की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी ?

रिपोर्ट @ आफाक अहमद मंसूरी