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भाजपा ने सोनिया पर लगाया दिल्ली हिंसा के राजनीतिकरण का आरोप, कहा- शाह के इस्तीफे की मांग हास्यापद
February 26, 2020 • Tariq • राष्ट्रीय

 

भाजपा ने सोनिया पर लगाया दिल्ली हिंसा के राजनीतिकरण का आरोप, कहा- शाह के इस्तीफे की मांग हास्यापद।

दिल्ली हिंसा को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। अब तक इस हिंसा में 21 लोगों की मौत हो गई है और 180 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। वहीं, दिल्ली हिंसा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने के कांग्रेस और सोनिया गांधी के बयान पर बुधवार को भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि जिनके हाथ निर्दोष सिखों के खून से रंगे हो, वे अब हिंसा रोकने में सफलता-असफलता की बात कर रहे हैं। भाजपा द्वारा यह बयान उस समय आया है जब कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि यह हिंसा पूरी तरह से सोचा-समझा षड्यंत्र है। भाजपा के कई नेताओं ने भड़काऊ बयान देकर नफरत और भय का माहौल पैदा किया।
उन्होंने इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा कि गृह मंत्री पहले दिन से ही शांति बहाली के प्रयास में लगे हुए थे और पुलिस के साथ लगातर काम कर रहे हैं, निर्देश दे रहे हैं और मनोबल बढ़ाने में लगे हैं। 

शाह के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग को हास्यास्पद बताते हुए जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस पूछ रही है कि अमित शाह कहां थे? अमित शाह ने कल सभी दलों की बैठक ली, जिसमें आप पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस के नेता भी उपस्थित थे। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की ऐसी टिप्पणियों से पुलिस का मनोबल गिरता है। जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली की हिंसा पर जो बयान दिया है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हिंसा समाप्त हो रही है और सच्चाई सामने लाने के लिये जांच भी शुरु हो गई है। हमारा विश्वास है कि पुलिस की जांच में सच्चाई सामने आएगी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता जावड़ेकर ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि जांच में यह बात भी सामने आ जाएगी कि किसने पथराव की तैयारी की, किसने वाहनों में आग लगाई और कौन पिछले दो माह से लोगों को उकसा रहा था।

उन्होंने कहा कि अब हिंसा समाप्त हो रही है और सबका एक मात्र लक्ष्य है कि हिंसा पूर्ण रूप से रुके और स्थायी शांति हो। चर्चा के लिए तो संसद का सत्र है, वहां चर्चा कर सकते हैं।

रिपोर्ट@त्रिलोकी नाथ