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बिना तैयारी का लॉकडाउन हुआ जानलेवा, लोगों का सब्र टूटा, पैदल निकल पड़े घरों को
March 29, 2020 • Tariq • राष्ट्रीय

बिना तैयारी का लॉकडाउन हुआ जानलेवा, लोगों का सब्र टूटा, पैदल निकल पड़े घरों को

हजारों संख्या में पलायन कर रहे गरीब कामगार जो कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के संक्रमण को दावत दे रहें, ऐसे में बिना तैयारी किए लॉक डाउन पर उठे सवाल

लखनऊ, 29 मार्च, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिना किसी तैयारी के किया गया 21 दिन का लॉकडाउन अब घातक होता जा रहा है। इस लॉकडाउन के चलते बड़े शहरों से अपने गांव की ओर पलायन कर रहे गरीबों कामगारों की मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया है। और हजारों संख्या में देशभर में राहगीर निकल पड़े अपने घरों के लिए जो कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के संक्रमण को दावत दे रहा है ऐसे में बिना तैयारी किए लॉक डाउन पर सवाल उठ रहे हैं। जहां एक तरफ कोरोना के बीच सरकार द्वारा सभी देशवासियों को जागरूक करते हुए घरों में रहने पर लॉक डाउन, वहीं इसी लॉक डाउन के बीच गरीब, मजदूर, राहगीर जरूरत मंद अपनी भूख प्यास और अपने घर जाने के बीच सड़कों पर नजर आए।
 लॉकडाउन के बाद मुंबई से गुजरात पैदल जा रहे चार मजदूरों की सड़क हादसे में मौत के बाद अब दिल्ली से मुरैना पैदल जा रहे एक मजदूर की भूख और प्यास से मौत का मामला सामने आया है। मृतक शख़्स का नाम रणवीर बताया जा रहा है, जो मध्य प्रदेश के मुरैना का रहने वाला था और दिल्ली में काम करता था।
लॉकडाउन के बाद जब उनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हुआ तो पीएम मोदी के लॉकडाउन के फैसले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जब उन सभी के पेट ने भूख की दस्तक दी तो लॉक डाउन और कोरोना की परवाह ना करते हुए निकल पड़े..

 राजा के फरमान के बाद अपने ही देश में बिना कोरोना संक्रमण के लोग भूख से मर गए।
ऐसे न जाने कितने मजदूर भूख और प्यास के बीच पैदल चलते जंदगी हार जाएंगे। 
वर्तमान समय में देशभर में गरीब मजदूर लेबर और रोज कमाने और रोज खाने वाले लोग लॉकडाउन से लेकर चार दिन तक इंतजार किया बाहर नही निकले, इस उम्मीद से कि शायद सरकार कुछ इंतीजाम करेगी लेकिन जब उन सभी के पेट ने भूख की दस्तक दी तो लॉक डाउन के चौथे और पांचवें दिन उनके सब्र का बांध टूट गया और सभी लोग निकल पड़े भूखे प्यासे पैदल अपनी मंजिल की ओर अपने घरों की तरफ हर कदम बढ़ाते हुए और कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी को भूलकर अपनी परेशानी को महत्व देकर भीड़ ने रंग ले लिया जबकि कोरोना से लड़ाई भीड़ नही अपने अपने घरों में रहना है, लेकिन देशभर में सबसे ज्यादा गरीबी भी इसको झुठलाया नहीं जा सकता अगर अचानक से सब रोक दिया जाए तो गरीब पहले भूख से मरेगा, इसलिए सभी को देखते हुए ऐसा निर्णय होना चाहिए कि देश के हर जरूरतमंद को उनकी जरूरत पूरी करते हुए कोरोना से लड़ाई लड़कर कोरोना जैसी घातक बीमारी का अंत सभी देशवासी मिलकर करें।

रिपोर्ट आफाक अहमद मंसूरी