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एसडीएम ने भेष बदला, रोजमर्रा की वस्तुओं की ज्यादा कीमत न वसूले दुकानदार, हाथ में फटा झोला लेकर पहुंची
April 1, 2020 • Tariq • उत्तरप्रदेश

एसडीएम ने भेष बदला, रोजमर्रा की वस्तुओं की ज्यादा कीमत न वसूले दुकानदार, हाथ में फटा झोला लेकर पहुंची 

परचून की दुकान पर एसडीएम ने कई वस्तुएं खरीदीं, बिल चुकाने के बाद एसडीएम ने पुलिस को बुलाया, बीस दुकानदारों को नोटिस..

लखनऊ, 01 अप्रैल 2020, पैरों में पुरानी हवाई चप्पल, हाथ में छोटा सा घिसा पिटा पर्स। सिलवटों वाला पुराना सूट और चेहरे पर चुन्नी से घूंघट। एसडीएम मोहनलालगंज का ये बदला रूप कोई नहीं पहचान पाया। नतीजतन कई दुकानदारों ने जरूरी वस्तुओं की कीमत एमआरपी से ज्यादा बताई। इसके बाद 20 दुकानदारों को जब नोटिस मिला तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई।
गरीब और मजबूर लोगों से कोई आटा, दाल, चावल, तेल आदि की रोजमर्रा की वस्तुओं की ज्यादा कीमत न वसूले है लिए एसडीएम पल्लवी मिश्रा ने भेष बदला। एसडीएम ने बताया कि उन्होंने आलमारी से एक पुराना सूट निकाला जो प्रेस भी नहीं था। एक महिला कर्मचारी से उसका पुराना छोटा पर्स लिया। फिर हवाई चप्पल पहन कर निकल गईं। अपनी गाड़ी उन्होंने काफी पहले छोड़ दी। फिर खुली हुई राशन की दुकान पर घूंघट में अन्य खरीदारों के बीच शामिल हो गईं। एसडीएम ने बताया कि कई दुकानदार एमआरपी से पांच या 10 रुपए ज्यादा पर वस्तुएं बेच रहे थे। क्योंकि ग्रामीण इलाकों में दुकानें कम होती हैं इसलिए इन सभी को चेतावनी दी गई है। इसके बाद दोबारा ऐसे ही किसी और तहसील के अधिकारी से जांच कराई जाएगी। जो नहीं सुधरेगा उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने मोहनलालगंज तहसील के सामने रायबरेली रोड, सिसेंडी मोड़ के आसपास बुधवार को करीब 30 दुकानों की जांच की।
बिल चुकाने के बाद एसडीएम ने पुलिस को बुलाया, एक परचून की दुकान पर एसडीएम ने कई वस्तुएं खरीदीं। इसके बाद बिल बनाने को कहा। इस पर दुकानदार अचकचाया फिर कच्चा बिल बनाकर दिया। उसने कई सामान का दाम ज्यादा लगाया था। जब एसडीएम ने पूछा कि ये चीजें इतनी महंगी क्यों तो वह बोला कि थोक में महंगा आ रहा है। बिल चुकाने के बाद एसडीएम ने तहसीलदार से लेकर इंस्पेक्टर मोहनलालगंज को मौके पर बुलाया। कस्बे की सभी दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा करने के आदेश दिए। दुकानदार युवती को जब पता चला कि खरीदारी एसडीएम कर रही थी वह मांफी मांगने लगी। जिसके बाद एसडीएम ने चेतवानी देकर छोड़ दिया।

रिपोर्ट @ आफाक अहमद मंसूरी