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जो ईश्वर का दर्शन करा दे केवल वही पूर्ण गुरु है-:- स्वामी दिव्येस्वरा नंद जी 
December 14, 2019 • Tariq • धर्म-अध्यात्म

 

जो ईश्वर का दर्शन करा दे केवल वही पूर्ण गुरु है-:- स्वामी दिव्येस्वरा नंद जी 

जगतपुर (रायबरेली) 
जगतपुर के पंडित जालीपा विद्यालय में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा चल रही श्री हरि कथा के चतुर्थ दिवस मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद प्रभु के पावन चरित्र को श्रवण करने के लिए अनेकों भक्तों का जनसैलाब पुनः उमड़ा। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं कथा व्यास स्वामी  दीवेस्वरा नंद जी ने ईश्वर के अनेकों अवतारों के बारे में मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि प्रत्येक मनुष्य के जीवन का मुकुट मणि लक्ष्य ईश्वर का अपने ही घट में दर्शन कर स्व जीवन को हरि मय करना है। स्वामी जी ने आगे बताया दिव्य ज्योति जागृति संस्थान लगभग चार दशक से विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों द्वारा व्यक्ति एवं समाज में मूलभूत परिवर्तन की नीव को सशक्त करने हेतु कार्यरत है । निष्काम भाव से सेवारत असंख्य कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं संत समाज के अथक प्रयासों से अभावग्रस्त क्षेत्रों में उत्थान कार्य, महिला सशक्तिकरण, नैतिक मूल्यों का प्रसार, चारित्रिक विकास ,नशा उन्मूलन इत्यादि गतिविधियां समाज को सकारात्मक उर्जा से पोषित कर रही हैं। शास्त्र ग्रंथों पर आधारित सरस सारगर्भित वैज्ञानिकता से परिपूर्ण सनातन ज्ञान पर आधारित एवं सांस्कृतिक वैभव से युक्त अध्यात्मिक विवेचना पर आधारित अनेकों आध्यात्मिक कथाएं जैसे श्रीमद् भागवत कथा, श्री राम कथा ,श्रीमद् देवी भागवत कथा, श्री शिव कथा, श्री हरि कथा इत्यादि कार्यक्रम जहां जनमानस को भारत की गौरवशाली वैभव पूर्ण संस्कृति से अवगत कराती हैं, वही जिज्ञासु मनुष्य के हृदय में ईश्वर दर्शन के लिए अभिलाषा भी तीव्र करती है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी का कथन है तत्व वेत्ता ब्रह्म निष्ट गुरु द्वारा" दिव्य दृष्टि "के जागृत होने पर "परम प्रकाश "रूपी भगवान का भीतर साक्षात्कार करना ही" ध्यान "के प्रारंभ की शास्त्र सम्मत प्रक्रिया है। यही साष्वत ज्ञान "ब्रह्म ज्ञान" अर्थात "ब्रह्म" को जानना है। संस्थान संपूर्ण विश्व में इसी सनातन" ब्रह्म ज्ञान "को जन जन को निष्काम भाव से प्रदान कर रहा है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से समाज को अंतर जगत में स्थित दिव्यता का दर्शन करा रहा है।
स्वामी जी ने आगे ईश्वर के दिव्य अनन्य अनंत प्रेम का सारगर्भित वर्णन करते हुए बताया कि अपने जीवन के अंदर केवट, सबरी, ध्रुव, प्रहलाद एवं स्वामी विवेकानंद आदि जैसे भक्त बन जाना ही जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि है। स्वामी जी ने केवट प्रसंग का बहुत ही मार्मिक ढंग से सचित्र वर्णन किया और बताया कि यदि हम महान केवट जैसे भक्त बनना चाहते हैं तो यह तभी संभव है जब सामंत ऋषि जैसे पूर्ण गुरु की तलाश अपने जीवन के अंदर करें। चुकी जब तक पूर्ण गुरु नहीं मिलेंगे दिव्य दृष्टि की प्राप्ति नहीं होगी और जब तक दिव्य दृष्टि की प्राप्ति नहीं होगी ईश्वर का प्रकटीकरण अथवा साक्षात्कार अंतर हृदय में होना संभव है और जब तक ईश्वर से मिलन नहीं होगा तब तक वह सच्चा प्रेम जो भक्त केवट ने प्रभु श्री राम के श्री चरणों से किया हम कैसे कर सकते हैं। प्रथम मुलाकात में ही भक्त केवट कहते हैं
"कहाही तुम हार मरम मैं जाना।"
अर्थात हे प्रभु मैं आप के मर्म को जानता हूं। विचारणीय तथ्य है की आखिर ईश्वर का मर्म क्या है जो केवट जानते हैं हम नहीं जानते। केवट ऐसे ही महान भक्त नहीं बन गए जिनका नाम ग्रंथों के अंदर दर्ज हो गया शास्त्रों के अंदर वर्णन आता है केवट अपने गुरुदेव सामंत ऋषि के आश्रम में अनेकों वर्षों तक निवास करते हैं और पूर्ण निष्ठा एवं निष्काम भावना से गुरु चरणों की सेवा एवं एक निष्ठ गुरु चरणों का ध्यान कर अपने अंतर हृदय को आलोकित करते हैं। भक्त केवट ने अंतर हृदय में प्रभु श्रीराम के मर्म को जाना था "ब्रह्म ज्ञान" की साश्वत ध्यान के माध्यम से जो आज के मनुष्य को भी प्राप्त करने की नितांत आवश्यकता है। स्वामी जी ने केवट प्रसंग के सार तत्व को बताते हुए कहा कि केवट संसार रूपी तट पर बैठा प्रत्येक "जीव "का प्रतीक है और श्री राम प्रभु "ब्रह्म "के द्योतक हैं एवं निषाद राज इस प्रसंग के अंदर एक" संत "की भूमिका अदा कर रहे हैं। जब तक निषादराज जैसे "पूर्ण संत "की प्राप्ति नहीं होती हमें श्री राम प्रभु "साक्षात ब्रह्म "का दर्शन अंतर हृदय में कभी भी नहीं हो सकता और हम केवट जैसे महान भक्त कदापि नहीं बन सकते और अपने जीवन को सही मायने में सार्थक भी नहीं कर सकते। इसीलिए गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी का दिव्य उद्घोष है--
 "ईश्वर कोई कल्पना नहीं विशुद्ध वैज्ञानिक तत्व है ,फिर आप अपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण उस पर क्यों नहीं लगाते, ब्रह्म ज्ञान का ध्यान विज्ञान इसमें आपका सहायक हो सकता है।"
संस्थान के संयोजक स्वामी विश्वनाथ आनंद जी ने आगे बताया की 
"जिनके जीवन में पूर्ण गुरु नहीं होता , उनका जीवन भी कभी शुरू नहीं होता"
स्वामी जी ने बताया की यदि हम भी महान भक्त केवट समरी प्रहलाद जैसे भक्त बनने की तीव्र अभिलाषा रखते हैं तो गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की असीम कृपा से दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्री हरि कथा के समापन दिवस 15 दिसंबर रविवार को प्रातः 9:00 बजे "ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा समारोह" का विलक्षण आयोजन पंडित जालीपा विद्यालय के अंदर ही किया गया है जिसमें परमात्मा के दर्शन की अभिलाषा रखने वाले समस्त खोजी भक्तों के लिए आवाहन हैं ,अपने कदमों को आगे बढ़ाएं और अंतर हृदय में परमात्मा के प्रकाश का दर्शन करें और अपने जीवन को सार्थक करें। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री अमरेश सिंह, अध्यक्ष ,प्रधान संघ श्री रमाकांत यादव, ग्राम प्रधान, जगतपुर ,श्री आलोक सिंह, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा रायबरेली ,श्री त्रिभुवन सिंह ,पूर्व राजस्व निरीक्षक ,श्री भूपेंद्र सिंह ,मां मनसा मेडिकल एजेंसी, रायबरेली एवं श्री शीतला बक्स सिंह,रन बहादुर सिंह,बुधेन्द्र सिंह,चंद्रभान सिंह के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।आयोजक मंडल में नीरज सिंह,रमेश सिंह,पुष्पेंद्र सिंह,दिनेश कुमार,जयकरन मौर्य ने आये हुए अतिथियों का कोटि कोटि धन्यवाद दिया।

दीपक कुमार जगतपुर सवांददाता