ALL उत्तरप्रदेश विदेश राष्ट्रीय शिक्षा खेल धर्म-अध्यात्म मनोरंजन संपादकीय epaper
मजबूत नेतृत्व का अभाव भविष्य के लिये घातक
December 6, 2019 • Tariq • उत्तरप्रदेश

 

मजबूत नेतृत्व का अभाव भविष्य के लिये घातक


रायबरेली। नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक कर्मभूमि में कांग्रेस निरन्तर आपसी खींचतान, गिरोहबंदी, जातीय गोलबन्दी के साथ प्रबन्धको के वर्चस्व व महत्व के कारण अपना वैभव खोती जा रही है। संगठन में धार उत्पन्न करने के बजाय गणेश परिक्रमा का महत्व, इतनी दुर्दशा के बाद भी बरकार है, जनता से दूर तक रिस्ता न रखने वाली प्रबंधक की परिक्रमा टोली तिलक भवन या लक्जरी गाड़ियों से कभी बाहर नही आ पायी। संगठन में युवा नेतृत्व स्थापित करने के नाम पर जिस तरह अनुभवहीन पंकज तिवारी की जिलाध्यक्ष पद पर ताजपोशी की गई वह जनता को छोड़िये कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही नही भायी, ब्लाक अध्यक्ष पद से सीधे जिलाध्यक्ष पद पर पहुचे पंकज तिवारी को संगठन का अनुभव नही, समाज को जोड़ने की कला नही यह बात कांग्रेसी कहने से नही चूक रहे है। हालांकि कांग्रेस की दलीय राजनीति में दो जाति का पूरा वर्चस्व कल की तरह आज भी कायम है। नेहरू गांधी खानदान  के बल पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी  यहां से लगातार संसद में प्रतिनिधित्व कर रही है पर चाटुकारों के चलते दिन प्रतिदिन कमजोर होते संगठन के कारण उनको प्राप्त मतों में गिरावट दर्ज होती रही है। विगत लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के समर्थन के बाद भी उनकी विजय का अंतर इतना कम हो गया कि परिणाम आने के बाद लोगो को विश्वास नही हो रहा था । उसके बाद भी कांग्रेस का कर्ताधर्ताओं में स्वयम की समीक्षा का साहस नही हुआ। जनपद में कांग्रेस की पूरी राजनीति प्रबन्धको के हाथ मे रही, नई राजनीति में प्रबन्धको का असर कम हुआ जनहित पर लगातार संघर्ष के बल पर ही राजनीति में स्थापित हुआ जा सकता है, किन्तु कांग्रेसी इस मामले में हर अवसर पर फिसड्डी साबित हुए। आंतरिक अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस में सबको साथ लेकर चलने वाले नेतृत्व का अभाव भविष्य के लिये घातक साबित होने की संभावना को इंगित कर रहा है।

जिलाध्यक्ष अनुभवहीन
कांग्रेस के नवमनोनित  जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी युवा व पेशे से अधिवक्ता है उनकी जनपद की राजनीति में कोई विशेष पहचान नही रही है, वह कांग्रेस के राही ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में साधारण कार्यकर्ता रहे है। संगठन में अपना वर्चस्व स्थापित रखने व गणेश परिक्रमा को महत्व देने वाले प्रबंधक ने राष्ट्रीय नेतृत्व को समझकर ताजपोशी करा दी। जिससे उनके समाज के कई प्रभावशाली नेता कुपित है।अनुभवहीनता उनके लिये बड़ी चुनौती है।

मीडिया विभाग मतलब फ्लॉप शो
जनता से जुड़े मामलों व संगठन के लिये जनता से संवाद स्थापित रखने का जिम्मेदार मीडिया विभाग में कहने को संयोजक व तीन-तीन प्रवक्ता है, किंतु वह एक अपंग असहाय होने के साथ कांग्रेस के लिये बोझ साबित हुआ है, वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहा है।

बाहर के साथ अंदर भी चुनौती
कांग्रेस के जीर्ण-शीर्ण जनता से कटे संगठन को दो वर्ष बाद विधानसभा चुनाव की चुनौती का सामना करना है, किंतु वह चुनावी तैयारियों या जनहितों के मुद्दे पर गम्भीर नही दिखती, जनता के प्रश्नों पर ज्ञापन या थोड़ी देर के धरने की रस्मअदायगी की उसकी राजनीति को समाजवादी पार्टी, बसपा व भाजपा की तगड़ी चुनौती का  सामना करने के साथ आंतरिक मोर्चे पर कलह गोलबंदी का भी समान करना होगा, कठिन चुनौती से वर्तमान नेतृत्व अपने सहयोगियों के बल पर कितना सफल होंगे यह भविष्य के गर्भ में है।

मनीष कुमार श्रीवास्तव रायबरेली सवांददाता