ALL उत्तरप्रदेश विदेश राष्ट्रीय शिक्षा खेल धर्म-अध्यात्म मनोरंजन संपादकीय epaper
समाज को बांटती जातिवाद व धर्म की राजनीति
November 20, 2019 • Tariq • संपादकीय

 

यदि तुलसी माला, शिखा धारण आदि कर्मकांड करने से ही भक्ति, धर्म और देशभक्ति साबित होती है तो सबसे पहले इस देश के उन नेताओं तथा राजनेताओं को टोपी पहन लेनी चाहिए जो एक ओर तो हिंदुत्व के एजेंडे की आड़ में भोलीभाली जनता को बरगलाने में लगे गए हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर तमाम तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ देकर समुदाय विशेष के वोट को साधने की कोशिश कर रहे हैं। देश के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी सहूलियत के मुताबिक हिन्दू मुस्लिम के नाम पर समाज में जाति धर्म की खाई पैदा कर दी। सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस में राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के खातिर इंसान को इंसान से अलग कर दिया। आज सोशल मीडिया पर कट्टर हिन्दू व कट्टर मुस्लिम का चलन चल पड़ा है जो कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ही घातक साबित होगा।

यदि हमें समुदाय विशेष से इतनी ही नफरत है तो हम 

यदि वाकई हम समुदाय विशेष से इतनी नफरत करते हैं तो हमें सरकार की ओर से मुसलमानों के लिए प्रस्तावित तमाम योजनाओं का पुरजोर तरीके से विरोध करना चाहिए।

मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण के लिए चलाई जा रही कुछ योजनाओं का विवरण....

1: शादी से पहले स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली अल्पसंख्यक समुदाय की युवतियों को मोदी सरकार 51,000 रुपये देगी।

2: केंद्र सरकार द्वारा पढ़ाई-लिखाई के लिए मुस्लिम युवाओं को सहायता के रूप में छात्रवृति दी जाएगी। केंद्रीय अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने 5/6/19 को अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद अगले पांच साल में 5 करोड़ विद्यार्थियों को 'प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति' देने का एलान किया था। 

3: सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी सकूलों में पढ़ने वाली उन अल्पसंख्यक छात्राओं को स्कॉलरशिप योजना का लाभ मिलेगा जिनके माता पिता की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक न हो और उसने पिछली क्लास में कम से कम 50 फीसदी अंक प्राप्त किए हों. ( सिर्फ 50 प्रतिशत अंक )

नोट: मैट्रिक परीक्षा से लेकर स्नाकोत्तर की पढ़ाई तक स्कॉलरशिप की योजनाएं चलाई गई हैं

4: केंद्र सरकार की ओर से रोशनी नामक स्कीम भी चल रही है जिसके तहत अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को प्रशिक्षण, जानकारी और साधन मुहैया कराए जाएंगे। अगर सरकार की मानें तो इस योजना के तहत पिछले पांच साल में 2.97 लाख अल्पसंख्यक महिलाओं को लाभ मिला है।

अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण, उद्धार, प्रगति, शशक्तिकरण तथा विकास के लिए मोदी सरकार की ओर चलाई जा रहीं कुछ योजनाओं के नाम इस प्रकार हैं..

नई मंजिल योजना, स्किल इंडिया एवं मेक इन इंडिया, नई रोशनी योजना, हमारी धरोहर योजना, प्रोग्रेस पंचायत कार्यक्रम, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा हेतु उठाए गए कदम, तीन तलाक पर महिलाओं को राहत आदि तमाम ऐसी योजनाएं हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए चलाई जा रही हैं।

अब आप इसे देखकर समझ सकते हैं कि सरकार की कथनी और करनी में कितना फर्क है। एक तरफ तो देश को यह बताया जा रहा है कि यह हिंदुओ की सरकार है और यहाँ दूसरे वर्ग तथा समुदाय के लोगों के लिए कोई जगह नहीं तो वहीं मुस्लिमों को रिझाने के लिए सरकार निम्न तरह की योजनाएं लागू कर रही है। जिस तरह से समाज को बांटा जा रहा है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज जिस तरह से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोत्तरी को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है यह पूर्ण रूप से मानवधिकारों का उल्लंघन है। सस्ती शिक्षा सबका अधिकार है। यदि हम किसी को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि नहीं दे सकते तो हमें उनकी आवाज को कुचलने का भी कोई अधिकार नहीं। यहाँ सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि कोई भी वर्ग तथा समुदाय अधिकारों से वंचित ना रहे।

नितिन शुक्ला आगरा ज़िला सवांददाता