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संविधान दिवस पर विधानमंडल के बुलाए गए विशेष सत्र को सी एम योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित
November 26, 2019 • Tariq • उत्तरप्रदेश

संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है, जिस दिन भारत के संविधान मसौदे को अपनाया गया था। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने से पहले 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया था। संविधान सभा के सदस्यों का पहला सेशन 9 दिसंबर 1947 को आयोजित हुआ। इसमें संविधान सभा के 207 सदस्य थे। संविधान की ड्रॉफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ बी आर अंबेडकर थे। इन्हें भारत के संविधान का निर्माता भी कहा जाता है। आपको बता दें कि सविधान सभा के सदस्यों ने हाथ ले लिखी गई दो कॉपियों (हिंदी और अंग्रेजी) पर हस्ताक्षर किए।  
संविधान दिवस पर विधानमंडल के बुलाए गए विशेष सत्र को संबोधित किया प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की मूल भावना न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व इन चार शब्दों में समाई हुई है। संविधान हमें अधिकार देता है तो कर्तव्यों का पालन करने के लिए भी कहता है। यही एक कारण है कि हम सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि का होने के बावजूद एक सदन में बैठे हुए हैं।

योगी ने कहा कि देश संविधान की भावना के अनुरूप चले इसमें देश की संवैधानिक संस्थाओं की बड़ी भूमिका होती है। आज संविधान लागू हुए 70 साल हो गए ये देश के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इन वर्षों में देश का लोकतंत्र मजबूत हुआ है। इसके पहले, विशेष सत्र में प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित किया। उन्होंने संविधान की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही संविधान प्रदत्त मौलिक कर्तव्यों की भी याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि जब हम मौलिक अधिकारों की बात करते हैं तो कर्तव्यों को कैसे भूल सकते हैं। अधिकार व कर्तव्य सदैव सहगामी होते हैं। कर्तव्य विहीन अधिकार निरंकुशता को जन्म देता है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना अब साकार हुआ है। सविधान दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल ने 17 मिनट का अभिभाषण पढ़ा। कहा कि आज के ही दिन 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान अंगीकृत किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 नवंबर 2015 को मुंबई में संविधान के महान शिल्पकार डॉ. भीमराव आंबेडकर की स्मृति में 26 नवंबर को भारत के संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, संविधान की प्रस्तावना का शुभारंभ हम भारत के लोग से होता है। हमारा संविधान भारत की राजव्यवस्था को संचालित करने का अप्रतिम पथ-प्रदर्शक है। संविधान के लक्ष्य या उद्देश्य उसकी प्रस्तावना में निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान का उद्देश्य यह भी है कि नागरिकों को स्वतंत्रता प्राप्त हो एवं सभी की समता व गरिमा सुनिश्चित हो। राज्यपाल ने प्रसन्नता जताई कि भारत सरकार ने एतिहासिक कदम उठाते हुए हाल ही में जम्मू कश्मीर राज्य से जुड़े अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटा दिया है। संविधान के अनुच्छेद 35-ए को समाप्त कर दिया है। जो कानून भारत के अन्य भागों में लागू होते हैं, वहीं अब जम्मू कश्मीर में भी लागू होंगे। एक देश एक विधान एक निशान का सपना अब साकार हुआ है।
आपको बता दें  
भारत के संविधान निर्माता के डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया है। यह दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। 

इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं।

यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था।

इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करनेवाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी।

संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित और कॉलीग्राफ्ड थी। इसमें किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षप किए । दो दिन बाद 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया था।

तमन्ना फरीदी