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सिर्फ कन्हैया कुमार पर ही देशद्रोह का मुकदमा क्यों ?
February 29, 2020 • Tariq • राष्ट्रीय

सिर्फ कन्हैया कुमार पर ही देशद्रोह का मुकदमा क्यों ?

कन्हैया कुमार ने कहा जब पहली बार चार्जशीट दाखिल की गई थी मै चुनाव लडने वाला था, अब बिहार में फिर से चुनाव होने वाले हैं

लखनऊ । जहां एक तरफ तीन दिनों से देश की राजधानी दिल्ली, दंगो की आग में जल रही थी जबकि दंगे को भड़काने वाले और जाति धर्म को बांटने वालो के बयान उसके अलावा हमला करने वाले, दिल्ली जलाने वाले, इंसानों का कत्ल करने और गोली चलाने वाले, मजार जलाने वाले, मस्जिदों को ढ़ाने और पत्थरों के जरिए इंसानों को घायल करने और खून बहाने वाले, घरों में घुसकर औरतों से बदसलूकी करने वाले, पुलिस प्रशासन भी हमलावरों के साथ दंगाइयों का साथ देने वाले जानवरों से भी बढ़कर हैवानियत को अंजाम देने वालो की तस्वीरे सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद और उनके चेहरे सामने आने के बाद भी शासन प्रशासन ने उन पर सख्त कार्रवाई क्यों नही की, उन सभी दरिंदो पर ठोस कारवाई करने के बजाए ऐसे में जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाए जाने से संबंधित मामले में दिल्ली सरकार अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा फैसला किया जी हां जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत दस अन्य आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को अनुमति दे दी, दिल्ली सरकार के इस सराहनीय कार्य के जरिए लगता है अब शायद दिल्ली में हुए उन दंगा करने वाले हमलावरों को सजा मिलेगी और दिल्ली की जनता को न्याय भी मिलेगा, क्योंकि हिंदुस्तान हमारा लोकतांत्रिक देश है और इसके खिलाफ बोलने की किसी को इजाजत नही । हालाकि इसपर कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया कि राजद्रोह के मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत और त्वरित कार्रवाई जरूरी है ताकि देश को पता चले कि इस पूरे मामले में राजनीतिक फायदों के लिए राजद्रोह कानून का किस तरह दुरुपयोग किया गया आगे कहा कि जब पहली बार चार्जशीट दाखिल की गई थी उस वक़्त मै चुनाव लडने वाला था और अब बिहार में फिर से चुनाव होने वाले हैं ।

ऐसे सभी विवादित और देशद्रोही बयान देने वालो पर हो मुकदमा

तो क्या हुआ कि जब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली में बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि दिल्ली की जनता जब एक एक वोट कमल छाप पर दबाएगी तब 11 फरवरी को चुनाव नतीजे आते आते ही शाहीन बाग भी साफ होना शुरू हो जाएगा । तो क्या हुआ कि पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था जाफराबाद और चांद बाग की सड़कें खाली करवाइए इसके बाद हमें मत समझाइएगा, हम आपकी भी नहीं सुनेंगे, सिर्फ तीन दिन” इस बयान को दिए तीन दिन भी नहीं गुजरे थे कि दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाकों में आग लगने लगी। तो क्या हुआ कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया था कि जेएनयू को पाकिस्तानी चरमपंथी गुट लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफ़िज सईद का समर्थन है । तो क्या हुआ कि मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ीं और उन्होंने अपने बयान में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को 'देशभक्त' बताया । बाबा राम रहीम के समर्थक द्वारा देशद्रोही बयान कि अगर बाबा राम रहीम को कुछ भी हुआ तो हम दुनिया से हिदुस्तान का नक्शा मिटा देंगे, इसके अलावा बहुत से नेताओ के ऐसे बयान जारी हैं जो विवादित और देशद्रोही हैं जिनपर मुकदमे दर्ज होने की जरूरत है ।

रिपोर्ट @ आफाक अहमद मंसूरी