ALL उत्तरप्रदेश विदेश राष्ट्रीय शिक्षा खेल धर्म-अध्यात्म मनोरंजन संपादकीय epaper
सुनियोजित तरीके से दिल्ली में भड़काई गई हिंसा, दिल्ली पर मंडला रहे गंदी सियासत के काले साए
February 26, 2020 • Tariq • राष्ट्रीय

सुनियोजित तरीके से दिल्ली में भड़काई गई हिंसा

दिल्ली पर मंडला रहे गंदी सियासत के काले साए

लखनऊ, 26 फरवरी 2020 रिहाई मंच ने दिल्ली में भाजपा प्रायोजित हिंसक हमलों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गृहमंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया। रिहाई मंच नेता शाहरुख अहमद ने कहा कि देश की राजधानी में 22 फरवरी से ही हिंसा का माहौल बना दिया गया था और उसी दिन से छुटफुट घटनाएं भी शुरू हो गई थीं। दिल्ली पुलिस कहीं स्वंय दंगाई की भूमिका में थी तो कहीं अपनी निष्क्रियता से दंगाइयों का हौसला बढ़ा रही थी। उन्होंने कहा कि जो दिल्ली पुलिस धारा 144 का हवाला देकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध लाठियां बरसाती थी उसी की मौजूदगी में हिंदुत्ववादी दंगाई भीड़ आसानी से इकट्ठा हुई और अगले तीन दिनों तक घूमघूम कर मुस्लिम आबादी और राहगीरों पर लाठी, डंडे, तलवारों, पेट्रोल बमों और अग्नि अस्त्रों से हमले करती रही। दंगाई भीड़ के हमले में मारे गए रोहित सोलंकी के पिता ने भी दंगा भड़काने के लिए कपिल मिश्रा का ही नाम लिया है।
रिहाई मंच नेता रवीश आलम ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि उसने कपिल मिश्रा का भड़काऊ विडियो नहीं देखा ? उसने शायद सोशल मीडिया पर वायरल व्हाटस्एप के वो संदेश भी नहीं देखे जिसमें दंगाइयों को चांदबाग भेजने, अग्नि अस्त्र साथ लाने और मुसलमानों को गोली मारने की बात कही जा रही थी ?
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा के घृणास्पद बयानों के बाद शुरू हुई एक तरफा हिंसक आग में प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा सरीखे नेता घी डालते रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं का खुलकर दंगाई भीड़ का मनोबल बढ़ाना और दिल्ली पुलिस का दंगाई भीड़ के प्रति व्यवहार साबित करता है कि सीएए के विरोध और समर्थन के की आड़ में सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काई गई थी और ऐसा गृह मंत्रालय के मूक समर्थन के बिना संभव नहीं हो सकता। दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी अभय वर्मा दिल्ली पुलिस आयुक्त से भाजपा नेता कपिल मिश्रा के भड़काऊ बयान पर शिकायत दर्ज करवाते हैं तो उसे विभाग द्वारा तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। ये घटना अपने आप में बहुत कुछ बताती है।

रिपोर्ट @ आफाक अहमद मंसूरी